राजधानी चौपाल, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितताओं और अमेरिकी आर्थिक संकेतकों के बीच बुधवार को सोना और चांदी की कीमतों (Gold Silver Price) में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोना 1,850 रुपये प्रति 10 ग्राम तक टूट गया, जबकि चांदी की कीमत में 1,500 रुपये प्रति किलोग्राम की कमी आई।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर बनी स्थिति, ऊंची ब्याज दरों की आशंका और बढ़ती महंगाई की चिंताओं ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा दिया है। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,59,600 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर पहुंच गया। इससे पहले इसका भाव 1,61,450 रुपये प्रति 10 ग्राम था। वहीं चांदी की कीमत भी नरम रही और 1,500 रुपये प्रति किलोग्राम घटकर 2,69,500 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,71,000 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।
Gold Silver Price : वैश्विक बाजारों का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दबाव में नजर आए। हाजिर सोना 0.54 प्रतिशत गिरकर 4,463.84 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं चांदी करीब 1 प्रतिशत टूटकर 74.43 डॉलर प्रति औंस रह गई। न्यूयॉर्क के कॉमेक्स बाजार में जुलाई डिलीवरी वाली सिल्वर फ्यूचर्स कीमत भी 1.36 प्रतिशत गिरकर 74.52 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
Gold Silver Price : अमेरिका-ईरान तनाव और महंगाई की चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मिराए एसेट शेयरखान के जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह के मुताबिक अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर स्पष्टता नहीं होने से सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
वहीं ऑगमोंट की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी का मानना है कि शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हुआ है, जिसके चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति अपनाने की संभावना मजबूत हुई है। यही कारण है कि निवेशक फिलहाल सोना और चांदी में सतर्क रुख अपना रहे हैं।
भारत ने चांदी आयात नियम किए सख्त
रेनिशा चैनानी के अनुसार भारत सरकार ने चांदी के आयात नियमों को और कड़ा कर दिया है। अब चांदी के ग्रेन और पाउडर स्वरूप को भी प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल किया गया है, जिसके आयात के लिए पूर्व अनुमति जरूरी होगी।
दुनिया के सबसे बड़े चांदी उपभोक्ताओं में शामिल भारत का यह कदम आयात नियंत्रण के जरिए विदेशी मुद्रा और रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
फेडरल रिजर्व के फैसलों पर टिकी बाजार की नजर
विश्लेषकों का कहना है कि इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल और रोजगार आंकड़े बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। अप्रैल महीने में अमेरिकी जॉब ओपनिंग्स उम्मीद से बेहतर रहने के बाद यह संभावना बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी विश्लेषक मानव मोदी के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से पहले निवेशक सतर्क बने हुए हैं। इसी बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में भी तेज उछाल देखने को मिला, जिससे महंगाई संबंधी चिंताएं और बढ़ गई हैं।
खरीदारी करें या इंतजार?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोना और चांदी फिलहाल वैश्विक आर्थिक संकेतों और फेडरल रिजर्व की नीतियों से प्रभावित रहेंगे। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट खरीदारी का अवसर हो सकती है, लेकिन अल्पकालिक निवेशकों को अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है। फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है, इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए चरणबद्ध निवेश रणनीति अपनानी चाहिए।