Hydrogen train update : जींद : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच चली। इसके साथ ही हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली ट्रेन शुरू करने वाला भारत दुनिया का पांचवां देश बन गया है।
इससे पहले जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन में ही हाइड्रोजन ट्रेनें चल रही हैं। 10 कोच वाली यह ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर 14 स्टेशनों के बीच अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। इसका किराया 10 से 25 रुपये के बीच रखा गया है। ट्रेन 89 किलोमीटर का सफर करीब दो घंटे में पूरा करेगी।
पहले दिन ट्रेन में जींद जंक्शन से 270 यात्रियों ने सफर किया, जिसमें से 200 विद्यार्थी शामिल रहे। सात महीने के बाद जींद से सोनीपत के लिए हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया। जनवरी माह की शुरूआत में ट्रेन दिल्ली से जींद पहुंच गई थी। पिछले सात महीने के दौरान ट्रेन व इंजन के काफी ट्रायल हुए।
ट्रेन को हरी झंडी देते समय दूसरे प्लेटफार्म पर खड़े यात्रियों ने जय श्री राम और भारत माता की जय के नारे लगाकर अपनी प्रसन्नता जाहिर की। हालांकि रेलवे द्वारा जारी पत्र के अनुसार ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच एक चक्कर लगाएगी, जो सुबह सात बजकर 40 मिनट पर जींद से चलकर नौ बजकर 40 मिनट पर सोनीपत पहुंचेगी।
इसके बाद 10 बजकर 40 मिनट पर ट्रेन सोनीपत से रवाना होकर दोपहर एक बजे तक जींद पहुंचेगी। रेलवे कर्मचारियों के अनुसार यात्रियों के लिए ट्रेन के सुचारू रूप से चलने को लेकर सुचारू रूप से कोई नोटिफिकेशन नहीं आया। अभी सुचारू रूप से ट्रेन चलने को लेकर समय लग सकता है।-
राजेश कुमार जींद मुख्यालय में तैनात लोको पायलट (पैसेंजर) हैं। उन्हें भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन की जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने बताया कि लोको पायलट का यात्रियों से सीधे संवाद नहीं होता। यदि किसी यात्री को सहायता की जरूरत होती है, तो लोको पायलट ट्रेन मैनेजर से संपर्क करता है। इसके बाद ट्रेन मैनेजर पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए यात्रियों तक सूचना पहुंचाता है और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
हाइड्रोजन ट्रेन को गगनदीप सिंह चला रहे हैं। वह जींद मुख्यालय में तैनात सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट हैं। उन्हें भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के लिए स्पेशल ट्रेनिंग दी गई है। गगनदीप सिंह ने बताया कि चेन्नई से आए एक्सपर्ट्स ने इसकी पूरी तकनीक और संचालन प्रक्रिया की जानकारी दी।
यह करीब 3200 हार्सपावर की अत्याधुनिक ट्रेन है। इसमें आठ ट्रैवल (यात्री) कोच और दो पावर कार हैं। एक पावर कार आगे और दूसरी पीछे लगी है, जिससे ट्रेन को आवश्यक शक्ति मिलती है।