चाय खत्म, कप भी खत्म! Hisar में बना ऐसा अनोखा कप जिसे खा सकते हैं

चाय खत्म, कप भी खत्म! Hisar में बना ऐसा अनोखा कप जिसे खा सकते हैं

राजधानी चौपाल, हिसार। प्लास्टिक और थर्माकोल से बने डिस्पोजल कप पर्यावरण (Hisar News) के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। चाय-कॉफी पीने के बाद आमतौर पर इन्हें कूड़े में फेंक दिया जाता है, लेकिन अब हिसार में इस समस्या का एक बेहद अनोखा समाधान सामने आया है।

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) के एग्री बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर (ABIC) ने ऐसा एडिबल कप तैयार किया है, जिसे चाय या कॉफी पीने के बाद फेंकने के बजाय बिस्किट की तरह खाया भी जा सकता है। यह नवाचार न केवल डिस्पोजल कप के इस्तेमाल को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि कृषि उत्पादों को नए व्यावसायिक अवसरों में बदलने की संभावनाएं भी दिखाता है।

गुड़ और अनाज से तैयार हुआ खाने योग्य कप

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के एग्री बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर की ओर से गुड़ और अनाज आधारित सामग्री से एडिबल कप तैयार किए गए हैं। इन कपों की खासियत यह है कि इनमें चाय या कॉफी पीने के बाद इन्हें कूड़ेदान में डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

यानी जिस कप को आमतौर पर इस्तेमाल के कुछ मिनट बाद कचरे में फेंक दिया जाता है, वही कप इस तकनीक में एक खाद्य उत्पाद के रूप में इस्तेमाल हो सकता है।

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यह प्रयोग खास तौर पर सिंगल यूज डिस्पोजल की बढ़ती समस्या के बीच एक अलग तरह का विकल्प पेश करता है।

सिर्फ एडिबल कप ही नहीं, स्मार्ट प्लांट पोट भी तैयार

ABIC की ओर से केवल खाने योग्य कप पर ही काम नहीं किया गया है। केंद्र ने स्मार्ट प्लांट पोट भी विकसित किए हैं, जिनका उद्देश्य पौधों की वृद्धि को तकनीक की मदद से बेहतर और अधिक प्रभावी बनाना है।

इन दोनों नवाचारों को पहली बार व्यापक स्तर पर लोगों के सामने रखा जाएगा। इससे विद्यार्थियों, युवाओं, किसानों और नए उद्यमियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि कृषि से जुड़े उत्पादों को आधुनिक तकनीक और बिजनेस मॉडल के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है।

20 अगस्त को HAU में दिखेगा नवाचारों का संसार

इन उत्पादों की पहली सार्वजनिक प्रदर्शनी 20 अगस्त 2026 को हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय उद्यमिता दिवस के अवसर पर आयोजित की जाएगी।

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प्रदर्शनी कॉलेज ऑफ बेसिक साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज में लगेगी। यहां कृषि क्षेत्र से जुड़े नवाचारों के साथ-साथ विभिन्न स्टार्टअप के उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा।

विद्यार्थी, युवा, किसान, उद्यमी और आम नागरिक प्रदर्शनी में पहुंचकर नई तकनीकों को करीब से देख सकेंगे और स्टार्टअप संचालकों से सीधे बातचीत भी कर सकेंगे।

मिलेट्स से लेकर ड्रोन तक, ये चीजें भी रहेंगी आकर्षण

प्रदर्शनी में एडिबल कप और स्मार्ट पोट के अलावा स्वास्थ्य, पोषण और आधुनिक कृषि से जुड़े कई उत्पाद देखने को मिलेंगे।

इनमें प्रमुख रूप से—

  • मिलेट्स से तैयार खाद्य पदार्थ

  • माइक्रोग्रीन

  • वेगन बार

  • प्रोटीन पाउडर

  • शहद से तैयार सिरका

  • पंचगव्य आधारित उत्पाद

  • आधुनिक कृषि ड्रोन

  • पौध पोषण से जुड़ी तकनीक

  • जैविक उर्वरक

  • खाद्य प्रसंस्करण की मशीनरी

शामिल हैं।

इस लिहाज से यह प्रदर्शनी केवल उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं होगी, बल्कि कृषि, तकनीक, स्वास्थ्य और स्टार्टअप को एक साथ देखने का अवसर भी देगी।

युवाओं के लिए स्टार्टअप शुरू करने का मौका

ABIC के निदेशक डॉ. राजेश गेरा के अनुसार, केंद्र का उद्देश्य युवाओं और उद्यमियों को केवल आइडिया तक सीमित रखने के बजाय उन्हें व्यवसाय शुरू करने के लिए जरूरी तकनीकी और इनक्यूबेशन सहयोग उपलब्ध कराना है।

जो युवा किसी क्षेत्र में अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं, उन्हें इनक्यूबेशन के साथ तकनीकी सहयोग और फंडिंग से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।

नए स्टार्टअप के लिए इनक्यूबेशन प्रोग्राम की आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक युवा 10 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन HAU की वेबसाइट अथवा ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है।

कृषि उत्पादों को बिजनेस में बदलने पर जोर

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति बीआर कांबोज ने कहा कि ABIC का लक्ष्य कृषि क्षेत्र में सामने आने वाले नए विचारों को व्यावसायिक अवसरों में बदलना है।

गुड़ और अनाज से तैयार एडिबल कप तथा कम पानी में पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देने वाला स्मार्ट पोट इसी सोच का उदाहरण हैं। ऐसे प्रयोग यह दिखाते हैं कि कृषि क्षेत्र में मौजूद पारंपरिक संसाधनों को नई तकनीक और उद्यमिता के साथ जोड़कर नए उत्पाद और कारोबार खड़े किए जा सकते हैं।

पर्यावरण और रोजगार—दोनों के लिए संभावनाएं

हिसार में सामने आया यह प्रयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक ओर सिंगल यूज डिस्पोजल से पैदा होने वाले कचरे को कम करने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर कृषि आधारित नए उत्पादों के जरिए युवाओं के लिए स्टार्टअप और रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

अगर एडिबल कप जैसे उत्पाद बड़े स्तर पर व्यावसायिक रूप से सफल होते हैं, तो आने वाले समय में चाय-कॉफी के साथ इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक डिस्पोजल कप के सामने एक नया विकल्प खड़ा हो सकता है।

हिसार से सामने आया यह नवाचार फिलहाल प्रदर्शनी में लोगों के बीच पहुंच रहा है, लेकिन इसकी असली खासियत इस सवाल में छिपी है—क्या आने वाले समय में चाय पीने के बाद कप को फेंकने के बजाय हम उसे खाएंगे?

Rahul Hindustani

Rahul Hindustani

राहुल हिंदुस्तानी हरियाणा की पत्रकारिता में सक्रिय एक निर्भीक और जनसरोकारों से जुड़े पत्रकार हैं। वे साप्ताहिक समाचार पत्र “राजधानी चौपाल” के संपादक एवं स्वामी हैं, जिसके माध्यम से वे आम जनता की आवाज़ को मजबूती से उठाते हैं। हरियाणा के विभिन्न जिलों में सक्रिय राहुल हिंदुस्तानी जमीनी मुद्दों, प्रशासनिक मामलों और राजनीतिक गतिविधियों पर सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी पत्रकारिता की पहचान है—तथ्य आधारित खबरें, बेबाक अंदाज और जनहित को प्राथमिकता। “राजधानी चौपाल” आज एक भरोसेमंद उभरता हुआ मंच बन चुका है, जो स्थानीय खबरों को तेजी और विश्वसनीयता के साथ लोगों तक पहुँचाता है।

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