Whicle news : बिना इंश्योरेंस गाड़ी वालों के लिए बड़ा झटका, अब पेट्रोल-डीजल भरवाने से पहले दिखाना पड़ सकता है बीमा

Whicle news : बिना इंश्योरेंस गाड़ी वालों के लिए बड़ा झटका, अब पेट्रोल-डीजल भरवाने से पहले दिखाना पड़ सकता है बीमा

राजधानी चौपाल, नई दिल्ली देशभर में बड़ी संख्या में वाहन मालिक इंश्योरेंस समाप्त होने के बाद उसका नवीनीकरण नहीं करवाते, जिससे सड़कों पर बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस गंभीर समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए केंद्र सरकार, संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया है, जिससे भविष्य में बिना वैध बीमा वाले वाहनों की पहचान आसान हो सके और उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

पेट्रोल पंप पर बीमा जांच की तैयारी

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि बीमा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया जाए। इसके तहत पेट्रोल पंपों पर ईंधन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को वाहन के वैध इंश्योरेंस स्टेटस से जोड़ने पर विचार किया जाएगा। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो बिना वैध बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं दिए जाने की व्यवस्था बनाई जा सकती है।

कैमरों से होगी पहचान, घर पहुंचेगा चालान

सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे और प्रमुख सड़कों पर लगे कैमरों का उपयोग बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान के लिए करने के निर्देश भी दिए हैं। अदालत का मानना है कि आधुनिक तकनीक के जरिए ऐसे वाहनों का पता लगाकर उनके मालिकों को स्वतः चालान भेजे जा सकते हैं। इसके लिए कैमरों को इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो और वाहन (VAHAN) पोर्टल से जोड़ने की दिशा में भी काम करने की बात कही गई है।

56% वाहनों के बिना बीमा होने पर जताई चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि देश में चल रहे लगभग 56 प्रतिशत वाहनों का बीमा समाप्त हो चुका है। इनमें सबसे अधिक संख्या दोपहिया वाहनों की बताई गई। अदालत ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग इसका पालन नहीं कर रहे हैं। इससे सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजा मिलने में भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

Must Read चाय खत्म, कप भी खत्म! Hisar में बना ऐसा अनोखा कप जिसे खा सकते हैं चाय खत्म, कप भी खत्म! Hisar में बना ऐसा अनोखा कप जिसे खा सकते हैं

क्या कहते हैं आंकड़े?

उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 30.4 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से केवल लगभग 16.5 करोड़ वाहनों का ही वैध बीमा है। वहीं सड़क दुर्घटनाओं के करीब 22 प्रतिशत मामलों में ऐसे वाहन शामिल पाए गए, जिनका बीमा नहीं था।

बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस चलाना है कानूनन अपराध

मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना वैध थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के वाहन चलाना दंडनीय अपराध है। पहली बार नियम तोड़ने पर तीन महीने तक की जेल, 2,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। दोबारा उल्लंघन करने पर तीन महीने तक की जेल और 4,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

IRDAI और परिवहन मंत्रालय मिलकर बनाएंगे योजना

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय मिलकर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें। इसका उद्देश्य बीमा नियमों का बेहतर पालन कराना, बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान करना और लोगों को समय पर इंश्योरेंस रिन्यू कराने के लिए प्रेरित करना है।

ट्रैफिक पुलिस को मिलेगी डिजिटल सुविधा

अदालत ने राज्यों की ट्रैफिक पुलिस को ऐसे डिजिटल उपकरण और मोबाइल ऐप उपलब्ध कराने की भी बात कही है, जो सीधे इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के पोर्टल से जुड़े हों। इससे मौके पर ही वाहन का इंश्योरेंस स्टेटस जांचा जा सकेगा और नियमों का प्रभावी पालन कराया जा सकेगा।

Also Read Vivo ने चौंकाया, S60 के बाद S50 सीरीज में उतारा नया फोन, 6500mAh बैटरी और 100x जूम Vivo ने चौंकाया, S60 के बाद S50 सीरीज में उतारा नया फोन, 6500mAh बैटरी और 100x जूम

दुर्घटना होने पर बढ़ सकती हैं मुश्किलें

यदि बिना बीमा वाला वाहन किसी दुर्घटना का शिकार होता है या उससे हादसा होता है, तो पीड़ित को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया काफी जटिल हो जाती है। ऐसे मामलों में वाहन मालिक को भी आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण अदालत ने सभी वाहन मालिकों से समय पर अपना वाहन बीमा नवीनीकृत कराने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

Rahul Hindustani

Rahul Hindustani

राहुल हिंदुस्तानी हरियाणा की पत्रकारिता में सक्रिय एक निर्भीक और जनसरोकारों से जुड़े पत्रकार हैं। वे साप्ताहिक समाचार पत्र “राजधानी चौपाल” के संपादक एवं स्वामी हैं, जिसके माध्यम से वे आम जनता की आवाज़ को मजबूती से उठाते हैं। हरियाणा के विभिन्न जिलों में सक्रिय राहुल हिंदुस्तानी जमीनी मुद्दों, प्रशासनिक मामलों और राजनीतिक गतिविधियों पर सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी पत्रकारिता की पहचान है—तथ्य आधारित खबरें, बेबाक अंदाज और जनहित को प्राथमिकता। “राजधानी चौपाल” आज एक भरोसेमंद उभरता हुआ मंच बन चुका है, जो स्थानीय खबरों को तेजी और विश्वसनीयता के साथ लोगों तक पहुँचाता है।

होम राज्य चुनें
Live TV Shorts
शॉर्ट न्यूज

Categories