राजधानी चौपाल, चंडीगढ़। हरियाणा में ठोस कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है।
अब ऐसे सभी संस्थान, उद्योग, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और बड़ी हाउसिंग सोसायटियां, जहां प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक कचरा निकलता है, उन्हें अपने परिसर में ही उसके वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था करनी होगी। यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत उठाया गया है।
सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार केवल कचरा अलग-अलग करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संबंधित संस्थान को उसके सुरक्षित संग्रहण, प्रसंस्करण और निस्तारण की भी जिम्मेदारी निभानी होगी। यदि कोई संस्था इन नियमों का पालन नहीं करती है तो स्थानीय निकाय उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकेंगे।
New Waste Rules : पहली बार किया उल्लंघन तो 5 हजार रुपए जुर्माना
पहली बार उल्लंघन करने पर 5 हजार रुपये, दूसरी बार 10 हजार रुपये और तीसरी बार 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। लगातार नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के लिए नगर निकाय कचरा संग्रहण की सुविधा भी बंद कर सकते हैं।
इस नई व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी जिला उपायुक्तों को सौंपी गई है। सभी जिलों में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बड़े कचरा उत्पादक संस्थान निर्धारित मानकों का पालन करें। यह नियम उन परिसरों पर लागू होंगे जहां प्रतिदिन 100 किलो या उससे अधिक कचरा निकलता है, 20 हजार वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल है अथवा प्रतिदिन 40 हजार लीटर या उससे अधिक पानी की खपत होती है।
इन नियमों के दायरे में बड़े होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल, निजी और सरकारी स्कूल, कॉलेज, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, बाजार, कार्यालय, मैरिज पैलेस, औद्योगिक इकाइयां, बड़ी आवासीय सोसायटियां और अन्य बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल किए गए हैं। ऐसे सभी संस्थानों को अपने यहां कचरा प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था विकसित करनी होगी।
नई व्यवस्था के तहत अब कचरे का वर्गीकरण भी पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित किया गया है। पहले जहां तीन प्रकार से कचरे को अलग किया जाता था, वहीं अब चार अलग-अलग श्रेणियों में कचरे का संग्रह करना अनिवार्य होगा। नीले डस्टबिन में सूखा कचरा जैसे कागज, प्लास्टिक, धातु और कांच रखा जाएगा।
New Waste Rules : गीला या जैविक कचरा जैसे भोजन अवशेष डाले जाएंगे
हरे डस्टबिन में गीला या जैविक कचरा जैसे भोजन और सब्जियों के अवशेष डाले जाएंगे। लाल डस्टबिन स्वच्छता अपशिष्ट जैसे सैनिटरी पैड, डायपर और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कचरे के लिए निर्धारित होगा, जबकि काले डस्टबिन में घरेलू खतरनाक कचरा जैसे एक्सपायर दवाइयां, बैटरियां, बल्ब, थर्मामीटर और रासायनिक पदार्थों वाले अपशिष्ट रखे जाएंगे।
राज्य सरकार ने हरियाणा के सभी 87 शहरी निकायों को इन नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि स्रोत स्तर पर ही कचरे का पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित होने से लैंडफिल पर दबाव कम होगा, प्रदूषण घटेगा और शहरों की स्वच्छता व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत होगी। साथ ही पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम देखने को मिलेंगे।