राजधानी चौपाल, नई दिल्ली/चंडीगढ़। भारतीय रेलवे हरित ऊर्जा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल से संचालित यात्री ट्रेन हरियाणा में शुरू होने की तैयारी में है। यह ट्रेन 17 जुलाई से जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर चलने की योजना है।
इस परियोजना को केंद्र सरकार की 'मेक इन इंडिया' और ग्रीन ट्रांसपोर्ट मिशन के तहत विकसित किया गया है। इसके शुरू होने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां हाइड्रोजन तकनीक पर आधारित यात्री ट्रेनें संचालित होती हैं।
प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर संचालित होगी। रेलवे की योजना के अनुसार इस रूट पर बीच में चार से पांच स्टेशनों पर ठहराव दिया जाएगा, जिससे दैनिक यात्रियों को भी इसका लाभ मिलेगा। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस ट्रेन का किराया सामान्य यात्रियों की पहुंच में रखने की तैयारी है और यह करीब 5 रुपये से 25 रुपये तक हो सकता है।
140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार, 2600 से अधिक यात्रियों की क्षमता
इस आधुनिक ट्रेन को चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी (ICF) में तैयार किया गया है, जबकि इसका डिजाइन रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) ने विकसित किया है। ट्रेन की अधिकतम गति 140 किलोमीटर प्रति घंटा होगी और इसमें 2,600 से अधिक यात्रियों के सफर करने की क्षमता होगी। इससे क्षेत्र के यात्रियों को तेज, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल यात्रा का विकल्प मिलेगा।
कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन?
यह ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजन की जगह 1,200 किलोवाट क्षमता वाले हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से चलेगी। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रिया से बिजली तैयार की जाती है, जिससे ट्रेन संचालित होती है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता, बल्कि केवल जलवाष्प (भाप) और थोड़ी गर्मी निकलती है। यही कारण है कि इसे भविष्य की सबसे स्वच्छ रेल तकनीकों में गिना जा रहा है।
भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। हाइड्रोजन ट्रेन जैसी परियोजनाएं इस लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। रेलवे का उद्देश्य डीजल आधारित परिवहन को धीरे-धीरे स्वच्छ ऊर्जा आधारित तकनीकों से बदलना है, जिससे प्रदूषण में कमी आए और ईंधन पर निर्भरता भी घटे।
35 हाइड्रोजन ट्रेनों की है योजना
रेल मंत्रालय की 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' योजना के तहत देश के विभिन्न हेरिटेज और पहाड़ी रेल मार्गों पर 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना बनाई गई है। प्रत्येक ट्रेन की अनुमानित लागत करीब 80 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जबकि संबंधित रूट पर हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए लगभग 70 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
जापानी तकनीक से मिलेगी हाइड्रोजन
इस परियोजना के लिए आवश्यक हाइड्रोजन उत्पादन में उन्नत PEM (Polymer Electrolyte Membrane) Electrolyser तकनीक का उपयोग किया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह प्रणाली प्रतिदिन लगभग 430 किलोग्राम हाइड्रोजन तैयार करने में सक्षम है, जिससे ट्रेन के नियमित संचालन में मदद मिलेगी।
हाइड्रोजन ट्रेनें पहले से जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन जैसे देशों में संचालित हो रही हैं। हरियाणा में इस ट्रेन की शुरुआत के साथ भारत भी इस अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने वाले देशों की सूची में शामिल हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय रेलवे के कई अन्य मार्गों पर भी हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों का विस्तार किया जा सकता है।