राजधानी चौपाल, चंडीगढ़। New Labour Code 2026: नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार के नए श्रम कानून (New Labour Code) में वेतन भुगतान, फाइनल सेटलमेंट और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इनका उद्देश्य कर्मचारियों को समय पर वेतन दिलाना, नौकरी छोड़ने या निकाले जाने की स्थिति में भुगतान में देरी रोकना और वेतन विवादों का जल्द समाधान सुनिश्चित करना है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये प्रावधान नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) का हिस्सा हैं और इनका प्रभावी क्रियान्वयन केंद्र और राज्यों द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद ही लागू होगा।
महीने की सैलरी तय समय सीमा में देना होगी
नए श्रम नियमों के अनुसार नियोक्ता (Employer) को कर्मचारियों का वेतन निर्धारित समय सीमा के भीतर देना होगा। मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को वेतन संबंधित वेतन अवधि समाप्त होने के बाद सात दिनों के भीतर भुगतान करना होगा।
वहीं दैनिक मजदूरी करने वाले कर्मचारियों को उनकी शिफ्ट समाप्त होने के बाद भुगतान किया जाएगा। साप्ताहिक आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों को उनकी साप्ताहिक छुट्टी से पहले वेतन देना होगा, जबकि पखवाड़ा (Fortnightly) आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों को संबंधित अवधि समाप्त होने के दो कार्य दिवस के भीतर भुगतान करना होगा।
नौकरी छोड़ने या निकाले जाने पर 2 दिन में फाइनल सेटलमेंट
नए लेबर कोड का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान फाइनल सेटलमेंट को लेकर है। यदि कोई कर्मचारी इस्तीफा देता है, रिटायर होता है या उसकी सेवा समाप्त कर दी जाती है, तो नियोक्ता को दो कार्य दिवस के भीतर उसका पूरा बकाया भुगतान करना होगा।
इसमें वेतन, अवकाश नकदीकरण (यदि लागू हो), अन्य देय भुगतान और अंतिम हिसाब शामिल होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों को महीनों तक भुगतान का इंतजार करने से बचाना और विवादों को कम करना है।
सभी कर्मचारियों पर लागू होंगे नियम
नए श्रम प्रावधानों का दायरा केवल कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। वेतन सीमा की परवाह किए बिना सभी कर्मचारियों पर संबंधित नियम लागू होंगे। यानी उच्च वेतन पाने वाले कर्मचारी और वरिष्ठ प्रबंधन (Senior Management) भी इन प्रावधानों के दायरे में आएंगे, जहां संबंधित श्रम कानून लागू होते हैं।
वेतन में देरी या गलत कटौती पर कहां करें शिकायत
यदि कोई नियोक्ता समय पर वेतन नहीं देता या बिना वैध कारण एवं नियमों के वेतन में कटौती करता है, तो कर्मचारी Inspector-cum-Facilitator के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
यह अधिकारी श्रम कानूनों के अनुपालन की निगरानी करने के साथ-साथ कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच विवादों का समाधान कराने का प्रयास करेगा। यदि मामला नहीं सुलझता, तो संबंधित पक्ष औद्योगिक न्यायाधिकरण (Industrial Tribunal) का रुख कर सकते हैं।
बकाया वेतन का दावा करने के लिए मिलेगा अधिक समय
नए श्रम प्रावधानों में कर्मचारियों को बकाया वेतन का दावा करने के लिए पहले की तुलना में अधिक समय दिया गया है। कर्मचारी तीन वर्ष के भीतर अपने बकाया वेतन या अन्य भुगतान के लिए दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे कर्मचारियों को आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य जुटाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
पे-स्लिप देना होगा अनिवार्य
नियोक्ता को प्रत्येक वेतन भुगतान के साथ कर्मचारी को फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक पे-स्लिप उपलब्ध करानी होगी। पे-स्लिप में वेतन, भत्ते, कटौतियां और शुद्ध भुगतान (Net Salary) का पूरा विवरण दर्ज होना चाहिए, जिससे भुगतान में पारदर्शिता बनी रहे।
वेतन विवादों का जल्द होगा निपटारा
नए श्रम प्रावधानों का उद्देश्य वेतन संबंधी मामलों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। ऐसे मामलों के निपटारे के लिए समयबद्ध प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है। यदि सक्षम प्राधिकारी के आदेश के बावजूद नियोक्ता भुगतान नहीं करता, तो बकाया राशि की वसूली राजस्व बकाया की तरह की जा सकती है।
महत्वपूर्ण बात
नए श्रम संहिता (Labour Codes) संसद से पारित हो चुकी हैं, लेकिन इनके सभी प्रावधान पूरे देश में एक साथ लागू नहीं हुए हैं। इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों द्वारा अधिसूचना जारी की जानी बाकी है। इसलिए कर्मचारियों और नियोक्ताओं पर इन नियमों का वास्तविक प्रभाव संबंधित अधिसूचना लागू होने के बाद ही पड़ेगा।