राजधानी चौपाल, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के विकास को नई दिशा देने की तैयारी में है। कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) और कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (KGP) एक्सप्रेस-वे के आसपास के क्षेत्र को विकसित कर एक नए आर्थिक और औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत दोनों एक्सप्रेस-वे के आसपास पांच किलोमीटर चौड़े क्षेत्र को ‘सेंट्रल एनसीआर’ के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
प्रदेश सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को ‘गोल्डन रिंग ऑफ अपॉर्च्युनिटी’ के रूप में विकसित करना चाहती है। इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCR Planning Board) की आगामी बैठक में रखा जाएगा। योजना का उद्देश्य KMP एक्सप्रेस-वे के आसपास लगभग 135 किलोमीटर लंबे क्षेत्र को उत्तर भारत के सबसे बड़े औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में विकसित करना है।
KMP-KGP : पंचग्राम परियोजना के तहत बसेंगे पांच नए शहर
सरकार ने KMP कॉरिडोर के आसपास पंचग्राम परियोजना के तहत पांच नए ग्रीनफील्ड शहर बसाने का खाका तैयार किया है। करीब ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में औद्योगिक टाउनशिप, आधुनिक आवासीय क्षेत्र और विश्वस्तरीय शहरी केंद्र विकसित किए जाएंगे। एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर दो से छह किलोमीटर तक के क्षेत्र में योजनाबद्ध विकास होगा, जिसकी निगरानी के लिए अलग से पंचग्राम विकास प्राधिकरण गठित किए जाने का प्रस्ताव है।
इस परियोजना से गुरुग्राम, मानेसर, बावल और आसपास के इलाकों में औद्योगिक निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) से जुड़े मानेसर-बावल निवेश क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे बड़े उद्योगों और वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
KMP-KGP : मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब होंगे विकसित
KMP कॉरिडोर में आधुनिक मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार करने की भी योजना है। मानेसर स्थित पंचगांव चौक पर दिल्ली-अलवर आरआरटीएस, गुरुग्राम-मानेसर मेट्रो और झज्जर-पलवल रेल लाइन को जोड़कर बड़ा ट्रांसपोर्ट हब बनाया जाएगा। वहीं गुरुग्राम के खेड़की दौला क्षेत्र में मेट्रो, आरआरटीएस और बस सेवाओं का एकीकृत केंद्र विकसित किया जाएगा, जिससे यातायात व्यवस्था और कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आएगा।
NCR के दायरे में होगा बड़ा बदलाव
हरियाणा सरकार ने एनसीआर क्षेत्र की नई परिभाषा का भी प्रस्ताव रखा है। वर्तमान में राज्य के 14 जिले किसी न किसी रूप में एनसीआर में शामिल हैं, लेकिन सरकार करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी सहित कई क्षेत्रों को एनसीआर से बाहर करने की सिफारिश कर चुकी है।
यदि नया प्रस्ताव लागू होता है तो हरियाणा का एनसीआर क्षेत्र मौजूदा 25 हजार वर्ग किलोमीटर से घटकर लगभग 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर रह जाएगा। यानी राज्य का करीब 60 प्रतिशत एनसीआर क्षेत्र कम हो सकता है। हालांकि, विकास गतिविधियों को प्रभावित होने से बचाने के लिए 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर चौड़ा आर्थिक कॉरिडोर एनसीआर के दायरे में बनाए रखने की सिफारिश भी की गई है।
पांच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में अहम भूमिका
सरकार का मानना है कि सेंट्रल एनसीआर और पंचग्राम परियोजना भविष्य में देश की आर्थिक प्रगति के प्रमुख इंजन साबित हो सकते हैं। वर्तमान में एनसीआर देश की जीडीपी में लगभग आठ प्रतिशत योगदान देता है। ऐसे में KMP-KGP कॉरिडोर का विकास भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।