राजधानी चौपाल, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्रदेश में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा (Haryana news) में बड़ा कदम उठाया है।
नई व्यवस्था के तहत अब जिला मुख्यालय स्थित प्रत्येक तहसील और उप-मंडल स्तर के पंजीकरण कार्यालयों में प्रतिदिन केवल 20 अपॉइंटमेंट (टोकन) ही जारी किए जाएंगे। यह नई रैंडम टोकन प्रणाली 2 जुलाई 2026 से पूरे राज्य में लागू कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे आम नागरिकों को समान अवसर मिलेगा और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और सुचारु होगी।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि नई व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी आवंटित टोकन पर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कराना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।
Haryana news : रैंडम टोकन से होगा अपॉइंटमेंट का आवंटन
नई व्यवस्था के अनुसार जिला मुख्यालय की प्रत्येक तहसील और उप-मंडल स्तर के उप-पंजीयक कार्यालयों में प्रतिदिन अधिकतम 20 टोकन जारी किए जाएंगे। इन टोकनों का चयन पूरी तरह रैंडम सिस्टम के जरिए होगा, जिससे किसी भी व्यक्ति को विशेष प्राथमिकता या सिफारिश का लाभ नहीं मिल सकेगा। हालांकि, प्रदेश की उप-तहसीलों में फिलहाल पहले से लागू व्यवस्था ही जारी रहेगी और वहां इस बदलाव का असर नहीं पड़ेगा।
VIP कल्चर और बिचौलियों पर लगेगी रोक
सरकार का कहना है कि रैंडम टोकन सिस्टम लागू होने से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में VIP संस्कृति, पक्षपात और सिफारिश जैसी शिकायतों पर प्रभावी रोक लगेगी। इसके अलावा जल्दी अपॉइंटमेंट दिलाने के नाम पर लोगों से अतिरिक्त पैसे वसूलने वाले बिचौलियों और एजेंटों की भूमिका भी काफी हद तक समाप्त होने की उम्मीद है।
भीड़ कम होगी, प्रक्रिया बनेगी आसान
नई व्यवस्था का उद्देश्य पंजीकरण कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करना और प्रत्येक आवेदक को समान अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार का दावा है कि तय संख्या में टोकन जारी होने से कार्यालयों में कामकाज अधिक व्यवस्थित होगा, प्रतीक्षा समय कम होगा और नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
इन मामलों में भी लागू होगा नया नियम
राजस्व विभाग के अनुसार यह नई व्यवस्था पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17 और धारा 18 के तहत होने वाले सभी अनिवार्य एवं वैकल्पिक संपत्ति पंजीकरण मामलों पर लागू होगी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक हितैषी बनेगी।