राजधानी चौपाल, हिसार। शहर के पुराने इंडस्ट्रियल एरिया में लंबे समय से (Hisar news) अधूरा पड़ा सड़क निर्माण कार्य अब जल्द दोबारा शुरू होने की उम्मीद है। करीब 10 महीने से रुका यह प्रोजेक्ट अब नए स्वरूप में आगे बढ़ सकता है।
नगर निगम अधिकारियों ने क्षेत्र में बार-बार होने वाले जलभराव और सड़कों की खराब स्थिति को देखते हुए डामर (तारकोल) की बजाय सीसी (कंक्रीट) रोड बनाने की योजना तैयार की है। अधिकारियों का मानना है कि कंक्रीट की सड़कें अधिक टिकाऊ होंगी और बारिश के दौरान होने वाली परेशानियों को काफी हद तक कम करेंगी।
जलभराव ने बदली सड़क निर्माण की रणनीति
पुराने इंडस्ट्रियल एरिया में हर मानसून के दौरान सड़कों पर पानी भरने की समस्या गंभीर रूप ले लेती है। कई जगह सड़कें टूट चुकी हैं और वाहन चालकों के साथ-साथ उद्योगों तक आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी स्थिति को देखते हुए नगर निगम अब सड़क निर्माण की पूरी रणनीति बदलने की तैयारी में है। यदि उच्च अधिकारियों से मंजूरी मिलती है तो पूरे प्रोजेक्ट को सीसी रोड के रूप में विकसित किया जाएगा।
1.50 करोड़ रुपये में हुआ था कार्य आवंटित
नगर निगम ने इस सड़क निर्माण कार्य का ठेका करीब 1.50 करोड़ रुपये में एक एजेंसी को दिया था। शुरुआती चरण में कुछ सड़कों का निर्माण डामर से भी किया गया, लेकिन बाद में परियोजना बीच में ही रुक गई। अब निगम उसी एजेंसी के साथ कंक्रीट सड़क निर्माण को लेकर चर्चा कर रहा है। अंतिम निर्णय उच्च अधिकारियों की स्वीकृति मिलने के बाद लिया जाएगा।
सीवरेज लाइन बिछाने के कारण रुका था निर्माण
पिछले वर्ष सड़क निर्माण शुरू होने के कुछ समय बाद पब्लिक हेल्थ विभाग ने कार्य रुकवा दिया था। विभाग का कहना था कि पहले क्षेत्र में नई सीवरेज लाइन डाली जानी आवश्यक है। इसके बाद सड़क बनाने पर दोबारा खुदाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। लगभग दो महीने पहले सीवरेज लाइन का काम पूरा हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद सड़क निर्माण दोबारा शुरू नहीं हो पाया।
बढ़ती लागत भी बनी देरी की वजह
सड़क निर्माण में देरी का एक कारण डामर की बढ़ी हुई कीमतें भी रही हैं। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते बिटुमेन (तारकोल) के दाम बढ़ने से कई सड़क परियोजनाओं की लागत प्रभावित हुई। ऐसे में नगर निगम अब कंक्रीट सड़क को अधिक व्यावहारिक और लंबे समय तक टिकाऊ विकल्प मान रहा है।
बारिश से पहले पूरा होना था काम, लेकिन नहीं बन सकी सड़क
नगर निगम की योजना थी कि मानसून शुरू होने से पहले सड़क निर्माण पूरा कर लिया जाए, लेकिन विभिन्न कारणों से ऐसा नहीं हो सका। परिणामस्वरूप बारिश शुरू होते ही क्षेत्र में फिर जलभराव की समस्या सामने आने लगी। उद्योग संचालकों और स्थानीय लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्टॉर्म वॉटर निकासी व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार केवल सड़क बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा। इंडस्ट्रियल एरिया में अभी तक समुचित स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम उपलब्ध नहीं है। नई सीवरेज लाइन बिछने के बावजूद वर्षा जल की निकासी के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत है। यदि सड़क निर्माण के साथ उचित चैंबर और जल निकासी प्रणाली विकसित नहीं की गई तो बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बनी रह सकती है।
दिल्ली रोड से कम ऊंचाई भी बढ़ा रही परेशानी
पुराने इंडस्ट्रियल एरिया की सड़कें दिल्ली रोड की तुलना में कई स्थानों पर नीचे स्तर पर हैं। इसके अलावा बारिश का पानी निकालने वाली कनेक्टिविटी भी पूरी तरह प्रभावी नहीं है। इसी वजह से बरसाती पानी आसानी से बाहर नहीं निकल पाता और लंबे समय तक सड़क पर जमा रहता है। सड़क का असमान लेवल भी समस्या को और गंभीर बना देता है।
मंजूरी मिलते ही शुरू होगा निर्माण
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार एजेंसी के साथ कंक्रीट सड़क निर्माण को लेकर प्रारंभिक चर्चा हो चुकी है। अब प्रस्ताव को उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही सड़क निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया जाएगा। निगम का उद्देश्य है कि भविष्य में इंडस्ट्रियल एरिया की सड़कें अधिक मजबूत हों और मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सके।