राजधानी चौपाल, हिसार। Haryana News: हरियाणा के हिसार और हांसी क्षेत्र के हजारों किसानों के सामने फसल बीमा को लेकर नई परेशानी खड़ी हो गई है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए इस बार एग्री स्टैक यूनिक आईडी को जरूरी कर दिया है। ऐसे में हिसार और हांसी के करीब 78 हजार किसानों की एग्री स्टैक आईडी अभी तैयार नहीं हुई है। इससे इन किसानों का फसल बीमा प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
फसल बीमा कराने की अंतिम तारीख 18 अगस्त निर्धारित की गई है। हालांकि बैंक से फसली ऋण लेने वाले किसानों को एग्री स्टैक आईडी नहीं होने की स्थिति में भी बीमा कराने की सुविधा दी गई है। वहीं, अन्य किसानों के लिए आईडी तैयार होना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
प्रदेश में अभी 58 फीसदी किसानों की ही बनी एग्री स्टैक ID
कृषि विभाग ने जनवरी 2026 में किसानों की एग्री स्टैक आईडी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसका उद्देश्य किसान की पहचान, जमीन और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी को एक डिजिटल रिकॉर्ड में जोड़ना है।
प्रदेश के 23 जिलों में पहले चरण के तहत प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थी 20,98,938 किसानों की एग्री स्टैक आईडी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 12,21,438 किसानों की आईडी तैयार हो चुकी है, जो कुल लक्ष्य का करीब 58.19 प्रतिशत है।
इस हिसाब से अभी भी बड़ी संख्या में किसानों की आईडी तैयार होना बाकी है। यही वजह है कि फसल बीमा की अंतिम तारीख नजदीक आने के साथ किसानों की चिंता बढ़ गई है।
हिसार में 40 हजार, हांसी में 32 हजार किसान इंतजार में
हिसार जिले में करीब 40 हजार किसानों की एग्री स्टैक आईडी अभी बननी बाकी है। वहीं हांसी में लगभग 32 हजार किसान इस प्रक्रिया के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार हिसार में करीब 54.90 प्रतिशत और हांसी में 48.99 प्रतिशत किसानों का ही नामांकन पूरा हो पाया है। बाकी किसानों की आईडी बनाने के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जा रहा है।
जमीन के रिकॉर्ड के मिलान में आ रही सबसे बड़ी दिक्कत
एग्री स्टैक आईडी तैयार करने के दौरान किसानों की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। इसमें आधार सत्यापन, मोबाइल नंबर, जमाबंदी, खसरा-खतौनी और जमीन के रिकॉर्ड जैसी जानकारियां शामिल हैं।
कई मामलों में सरकारी रिकॉर्ड और किसानों की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में अंतर सामने आ रहा है। इसी वजह से आईडी तैयार करने की प्रक्रिया में देरी हो रही है।
कृषि और राजस्व विभाग की टीमें गांवों में जाकर रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लंबित मामलों के कारण काम अभी पूरा नहीं हो पाया है।
एक डिजिटल पहचान में जुड़ेगी किसान की पूरी जानकारी
एग्री स्टैक आईडी को किसानों की डिजिटल पहचान के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इसके जरिए किसान और उसकी कृषि भूमि से जुड़ी विभिन्न जानकारियां एक ही डिजिटल सिस्टम में उपलब्ध कराने की योजना है।
भविष्य में इसी व्यवस्था का इस्तेमाल फसल सर्वे, कृषि ऋण, मुआवजा, सब्सिडी और दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में किया जा सकता है। इससे सरकार को भी वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
किसानों ने उठाया सवाल- सरकारी देरी की सजा हमें क्यों?
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान दिलबाग हुड्डा ने एग्री स्टैक आईडी की वजह से फसल बीमा प्रभावित होने की स्थिति पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यदि आईडी तैयार करने में देरी सरकारी स्तर पर हो रही है तो इसका खामियाजा किसानों को नहीं भुगतना चाहिए।
उन्होंने कहा कि फसल बीमा प्राकृतिक आपदा के समय किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का काम करता है। इसलिए केवल एग्री स्टैक आईडी नहीं बनने के कारण किसी किसान को बीमा योजना के लाभ से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल बंद होने से भी किसान परेशान
किसानों की एक और समस्या 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल को लेकर है। किसानों के अनुसार पोर्टल 31 जुलाई से बंद हो गया है। बारिश में देरी के कारण कई किसान समय पर अपनी फसल का पंजीकरण नहीं करा पाए।
हिसार में अभी तक करीब 24 हजार किसानों का ही फसल पंजीकरण हो पाया है। इस पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों का इस्तेमाल फसल खरीद और खाद सहित कई कृषि संबंधी प्रक्रियाओं में किया जाता है।
विभाग ने बताया- रिकॉर्ड में अंतर के कारण हो रही देरी
कृषि विभाग के उपनिदेशक राजबीर सिंह के अनुसार फसल बीमा सरकार की निर्धारित प्रक्रिया और नियमों के तहत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हिसार जिले में करीब 54 प्रतिशत किसानों की एग्री स्टैक आईडी तैयार हो चुकी है और बाकी किसानों की आईडी बनाने के लिए अभियान लगातार जारी है।
उन्होंने कहा कि किसानों के दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड में अंतर मिलने के कारण कई मामलों में आईडी तैयार करने में परेशानी आ रही है।
किस जिले में कितने किसानों का एग्री स्टैक नामांकन?
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में एग्री स्टैक आईडी बनाने की स्थिति अलग-अलग जिलों में अलग है।
-
चरखी दादरी: 73.15 प्रतिशत
-
अंबाला: 61.80 प्रतिशत
-
झज्जर: 57.88 प्रतिशत
-
पानीपत: 57.31 प्रतिशत
-
रोहतक: 56.96 प्रतिशत
-
कुरुक्षेत्र: 54.66 प्रतिशत
-
हिसार: 54.90 प्रतिशत
-
फतेहाबाद: 53.79 प्रतिशत
-
भिवानी: 53.15 प्रतिशत
-
सिरसा: 52.02 प्रतिशत
-
कैथल: 51.61 प्रतिशत
-
हांसी: 48.99 प्रतिशत
-
जींद: 43.83 प्रतिशत
18 अगस्त की डेडलाइन, हजारों किसानों की बढ़ी चिंता
फसल बीमा की अंतिम तारीख 18 अगस्त नजदीक आने के साथ ही एग्री स्टैक आईडी नहीं बनने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है। अब देखना यह होगा कि विभाग लंबित आईडी का काम समय रहते पूरा कर पाता है या फिर सरकार ऐसे किसानों को राहत देने के लिए कोई अतिरिक्त व्यवस्था करती है।