राजधानी चौपाल, चंडीगढ़। हरियाणा-एनसीआर में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में गुरुग्राम से झज्जर के बीच नए हाईवे की (Haryana New Highway) योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए प्रारंभिक सर्वे का काम पूरा हो चुका है और अब अंतिम रूट तय करने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 3,000 करोड़ रुपये आंकी गई है।
जानकारी के अनुसार, सर्वे रिपोर्ट में हाईवे निर्माण के लिए तीन संभावित रूट सुझाए गए हैं। अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इन विकल्पों का परीक्षण करेगा। अंतिम रूट तय होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
Haryana New Highway : एक लाख से ज्यादा लोगों को फायदा
सरकार का मानना है कि इस हाईवे के बनने से गुरुग्राम और झज्जर के बीच रोजाना सफर करने वाले एक लाख से अधिक लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में इस मार्ग पर भारी ट्रैफिक और लंबे जाम की समस्या बनी रहती है, जिससे यात्रियों को काफी समय बर्बाद करना पड़ता है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी इस मार्ग पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए नए हाईवे के निर्माण का सुझाव दिया था। झज्जर के बाढ़सा स्थित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (एनसीआई) और आसपास के चिकित्सा संस्थानों में आने-जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भी इस सड़क पर जाम का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से इस परियोजना को प्राथमिकता दी जा रही है।
सर्वे करने वाली एजेंसी ने तीन अलग-अलग विकल्प सुझाए हैं। पहले विकल्प में मौजूदा दो लेन सड़क का विस्तार कर उसे छह लेन हाईवे के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है, जिसमें सर्विस लेन भी बनाई जा सकती है।
Haryana New Highway : 495 एकड़ जमीन की जरूरत
दूसरे विकल्प के तहत गुरुग्राम के हरसरू क्षेत्र से झज्जर तक खेतों के बीच नया हाईवे बनाने का सुझाव दिया गया है। इसके लिए लगभग 495 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। बताया जा रहा है कि इसमें करीब 400 एकड़ भूमि पहले से ही सरकारी स्वामित्व में है, जिससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो सकती है।
तीसरे विकल्प में गुरुग्राम-पटौदी रोड के वजीरपुर क्षेत्र से नया रूट विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस मार्ग के लिए लगभग 475 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। सरकारी स्तर पर दूसरे विकल्प को अधिक व्यावहारिक माना जा रहा है, हालांकि अंतिम निर्णय एनएचएआई की एलाइनमेंट अप्रूवल कमेटी द्वारा लिया जाएगा। समिति की मंजूरी के बाद परियोजना अगले चरण में प्रवेश करेगी और डीपीआर तैयार होने के बाद निर्माण कार्य की दिशा स्पष्ट होगी।