राजधानी चौपाल, हिसार (Hisar news) : हरियाणा के हिसार में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। समय पर वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने के कारण एक नवजात शिशु की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बच्चे को गंभीर हालत में हिसार के नागरिक अस्पताल से रोहतक स्थित पीजीआई रेफर किया गया, लेकिन वहां भी करीब 15 घंटे तक वेंटिलेटर नहीं मिल सका।
आखिरकार बच्चे को वापस हिसार लाया गया, जहां एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मिली जानकारी के अनुसार, हिसार की महावीर कॉलोनी में रहने वाले राकेश कुमार की 26 वर्षीय पत्नी पूजा को बुधवार दोपहर प्रसव पीड़ा होने पर नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद जिले का रहने वाला है और हिसार में मजदूरी कर अपना जीवनयापन करता है।
डिलीवरी के बाद नवजात की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी, जिसके बाद अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा कक्ष (NICU) में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए रोहतक स्थित पीजीआई रेफर कर दिया।
Hisar news : साढ़े 5 बजे पहुंच गए थे पीजीआई रोहतक
परिजनों के अनुसार, बुधवार दोपहर करीब 3 बजे एंबुलेंस से नवजात को रोहतक ले जाया गया। शाम करीब 5:30 बजे पीजीआई पहुंचने पर बच्चे को भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन परिजनों को बताया गया कि तत्काल वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं है और सुबह तक इंतजार करना होगा।
परिवार का कहना है कि पूरी रात इंतजार करने के बावजूद वेंटिलेटर की व्यवस्था नहीं हो सकी। गुरुवार सुबह डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि अभी भी वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं है और बच्चे को किसी अन्य अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। परिजनों ने बताया कि अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भी संपर्क किया गया, लेकिन वहां भी वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं मिल सका। इसके बाद परिजन नवजात को वापस हिसार लेकर पहुंचे और एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने का प्रयास किया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
पिता श्रवण कुमार ने बताया कि यह दंपती का चौथा बच्चा था। महिला की समय से पहले (प्रीमैच्योर) डिलीवरी हुई थी और चिकित्सकों ने लंबे समय तक प्रसव पीड़ा रहने के बाद सिजेरियन ऑपरेशन किया था। दंपती के पहले से दो बेटे और एक बेटी हैं।
इस घटना के बाद परिजनों ने समय पर वेंटिलेटर उपलब्ध न होने और इलाज में हुई देरी को नवजात की मौत का कारण बताया है। वहीं, इस मामले ने गंभीर रूप से बीमार नवजातों के लिए सरकारी अस्पतालों में जीवन रक्षक सुविधाओं की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।