राजधानी चौपाल, नई दिल्ली। भारत में डिजिटल भुगतान को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई लेनदेन से जुड़ा नया नियम लागू किया है, जिसके तहत अब Google Pay, PhonePe, Paytm, BHIM समेत सभी प्रमुख UPI ऐप्स पर भुगतान करने से पहले प्राप्तकर्ता का बैंक रिकॉर्ड में दर्ज वास्तविक नाम दिखाई देगा।
अब जैसे ही कोई व्यक्ति किसी UPI आईडी, मोबाइल नंबर या QR कोड के माध्यम से भुगतान करने की प्रक्रिया शुरू करेगा, UPI PIN दर्ज करने से पहले स्क्रीन पर उस खाते का सत्यापित नाम दिखाई देगा, जिसमें पैसा भेजा जाना है। इससे उपयोगकर्ता अंतिम क्षण में भी यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि उनका पैसा सही व्यक्ति या व्यापारी के खाते में जा रहा है।
QR कोड स्कैन करते ही सामने आएगी असली पहचान
अब तक कई दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर लगे QR कोड स्कैन करने के बाद ग्राहकों को अक्सर केवल दुकान का नाम, निकनेम या कोई कस्टम डिस्प्ले नेम दिखाई देता था। कई मामलों में यह नाम बैंक खाते से मेल नहीं खाता था, जिससे भ्रम की स्थिति बन जाती थी।
नई व्यवस्था के तहत अब QR कोड स्कैन करते ही सीधे बैंक खाते से जुड़ा वास्तविक नाम दिखाई देगा। इससे ग्राहक भुगतान करने से पहले पूरी तरह आश्वस्त हो सकेंगे कि पैसा सही खाते में जा रहा है। NPCI ने स्पष्ट किया है कि अब UPI ऐप्स कस्टम नाम या QR आधारित नाम दिखाने के बजाय केवल बैंक द्वारा सत्यापित नाम ही प्रदर्शित करेंगे।
साइबर ठगी करने वालों के लिए बढ़ेगी मुश्किल
हाल के वर्षों में नकली QR कोड, फर्जी UPI आईडी और भ्रामक डिस्प्ले नेम के जरिए लोगों से ठगी के मामलों में तेजी आई है। कई बार अपराधी किसी प्रतिष्ठित दुकान या व्यक्ति जैसा नाम दिखाकर लोगों को धोखा दे देते थे।
NPCI के इस कदम से ऐसी धोखाधड़ी पर काफी हद तक लगाम लगने की उम्मीद है। अब भुगतानकर्ता को खाते का वास्तविक नाम पहले ही दिखाई देगा, जिससे फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगना आसान नहीं रहेगा। इसके साथ ही जल्दबाजी में गलत नंबर या गलत UPI आईडी पर पैसा भेजने की घटनाओं में भी कमी आएगी।
छोटे व्यापारियों को भी करना होगा बदलाव
इस नए नियम का प्रभाव छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और स्थानीय कारोबारियों पर भी पड़ सकता है। कई व्यापारियों के QR कोड उनकी दुकान के नाम से चलते हैं, जबकि बैंक खाता किसी परिवार के सदस्य के नाम पर होता है।
ऐसी स्थिति में ग्राहक जब भुगतान से पहले किसी अन्य व्यक्ति का नाम देखेंगे तो उनके मन में संदेह पैदा हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारियों को अपने बैंक खाते और व्यावसायिक पहचान के बीच स्पष्ट तालमेल बनाना होगा ताकि ग्राहकों का भरोसा कायम रहे।
आम लोगों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा आधार भरोसा होता है और यह नया नियम उसी भरोसे को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। अब लोगों को पैसे भेजने से पहले अंतिम सत्यापन मिल जाएगा, जिससे गलत खाते में रकम ट्रांसफर होने की चिंता काफी कम हो जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में भी डिजिटल भुगतान को लेकर लोगों का विश्वास बढ़ेगा। साथ ही UPI आधारित लेनदेन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनेंगे।
भुगतान करते समय इन बातों का रखें ध्यान
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UPI PIN डालने से पहले स्क्रीन पर दिखाई देने वाला नाम जरूर जांचें।
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यदि नाम संदिग्ध लगे तो भुगतान तुरंत रोक दें।
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केवल भरोसेमंद QR कोड और UPI आईडी का ही उपयोग करें।
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किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर जल्दबाजी में भुगतान न करें।
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गलत ट्रांजैक्शन होने पर तुरंत बैंक और UPI ऐप में शिकायत दर्ज करें।
डिजिटल इंडिया के दौर में UPI देश की सबसे लोकप्रिय भुगतान व्यवस्था बन चुकी है। ऐसे में प्राप्तकर्ता के वास्तविक बैंक-रजिस्टर्ड नाम को अनिवार्य रूप से दिखाने का यह फैसला करोड़ों उपभोक्ताओं को सुरक्षित भुगतान का नया भरोसा देने वाला साबित हो सकता है।