राजधानी चौपाल, नई दिल्ली। स्मार्टफोन आज हर घर की जरूरत बन चुका है, लेकिन इसके साथ जुड़ी एक छोटी-सी आदत हर साल लाखों यूनिट बिजली की बर्बादी (Mobile charger) का कारण बनती है। अधिकांश लोग मोबाइल चार्ज होने के बाद उसे तो चार्जर से अलग कर लेते हैं, लेकिन चार्जर को दीवार के सॉकेट में लगा हुआ ही छोड़ देते हैं।
कई लोग मानते हैं कि बिना फोन के चार्जर कोई बिजली खर्च नहीं करता, जबकि तकनीकी रूप से यह पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, चार्जर का स्विच ऑन रहने पर वह सीमित मात्रा में लगातार बिजली खपत करता रहता है। यह खपत भले ही बहुत कम हो, लेकिन पूरे साल और पूरे घर के हिसाब से इसका असर बिजली के बिल और सुरक्षा दोनों पर पड़ सकता है।
Mobile charger : चार्जर बिना फोन के भी क्यों करता है बिजली की खपत?
आधुनिक मोबाइल चार्जर केवल एक साधारण तार नहीं होता, बल्कि उसके अंदर पावर कन्वर्जन सर्किट, ट्रांसफॉर्मर, कैपेसिटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट लगे होते हैं। जैसे ही चार्जर को बिजली के बोर्ड में लगाकर स्विच ऑन किया जाता है, ये सभी सर्किट सक्रिय हो जाते हैं।

इनका काम घर में आने वाली 220-240 वोल्ट एसी (AC) बिजली को मोबाइल के लिए उपयुक्त 5V, 9V या उससे अधिक डीसी (DC) वोल्टेज में बदलना होता है। मोबाइल कनेक्ट न होने पर भी यह सर्किट पूरी तरह निष्क्रिय नहीं होता, इसलिए बहुत कम मात्रा में बिजली लगातार खपत होती रहती है। तकनीकी भाषा में इसे 'फैंटम लोड' (Phantom Load), 'वैम्पायर पावर' (Vampire Power) या 'स्टैंडबाय पावर' कहा जाता है।
Mobile charger : खाली चार्जर सालभर में कितनी बिजली खर्च करता है?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, एक अच्छी गुणवत्ता वाला मोबाइल चार्जर बिना किसी डिवाइस के प्लग में लगा रहने पर लगभग 0.1 से 0.5 वॉट बिजली की खपत कर सकता है। यदि यही चार्जर साल के 365 दिन, 24 घंटे लगातार ऑन रहे तो उसकी कुल खपत लगभग 1 से 4 यूनिट (kWh) तक पहुंच सकती है।
भारत में घरेलू बिजली की औसत दर 6 से 8 रुपये प्रति यूनिट मानें तो एक चार्जर से सालभर में लगभग 10 से 30 रुपये तक का अतिरिक्त खर्च हो सकता है। यह राशि देखने में छोटी लगती है, लेकिन यदि किसी घर में चार या पांच चार्जर हमेशा ऑन रहते हैं, तो कुल मिलाकर हर साल 100 से 150 रुपये या उससे अधिक की अनावश्यक बिजली खर्च हो सकती है।
Mobile charger : क्या बिजली बिल पर वास्तव में पड़ता है असर?
एक अकेले चार्जर से होने वाली बिजली की खपत बहुत कम होती है, इसलिए उसका असर सीधे बिजली बिल में साफ दिखाई नहीं देता। लेकिन समस्या तब बढ़ती है जब घर में कई चार्जर, टीवी, सेट-टॉप बॉक्स, वाई-फाई राउटर, माइक्रोवेव, स्मार्ट स्पीकर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगातार स्टैंडबाय मोड में बिजली लेते रहते हैं।
इन सभी उपकरणों की संयुक्त खपत सालभर में कई यूनिट बिजली तक पहुंच सकती है, जिससे बिजली बिल में अनावश्यक बढ़ोतरी होती है।
Mobile charger : बिजली से ज्यादा चिंता सुरक्षा की होनी चाहिए
विशेषज्ञों का मानना है कि खाली चार्जर से होने वाला सबसे बड़ा नुकसान बिजली की खपत नहीं, बल्कि सुरक्षा का जोखिम है। लंबे समय तक लगातार बिजली मिलने से चार्जर के अंदर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक हिस्सों में गर्मी पैदा होती रहती है। यदि चार्जर निम्न गुणवत्ता का है या उसमें पहले से कोई खराबी है, तो ओवरहीटिंग की संभावना बढ़ जाती है।
गर्मी के मौसम, खराब वायरिंग या अचानक वोल्टेज बढ़ने जैसी स्थितियों में लोकल या नकली चार्जर जल्दी खराब हो सकते हैं। ऐसे मामलों में शॉर्ट सर्किट, स्पार्किंग, धुआं निकलना या आग लगने जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
Mobile charger : बच्चों और पालतू जानवरों के लिए भी हो सकता है खतरा
यदि चार्जर प्लग में लगा हो और उसकी केबल नीचे लटक रही हो, तो छोटे बच्चे या पालतू जानवर खेलते-खेलते उसे पकड़ सकते हैं या मुंह में डाल सकते हैं। हालांकि सामान्य और प्रमाणित चार्जरों के आउटपुट पर कम वोल्टेज होता है, फिर भी क्षतिग्रस्त केबल, खराब चार्जर या असुरक्षित बिजली व्यवस्था की स्थिति में चोट या बिजली से जुड़ा खतरा बढ़ सकता है।इसलिए बच्चों की पहुंच से चार्जर और बिजली के उपकरण हमेशा दूर रखने की सलाह दी जाती है।
कौन-सी सावधानियां अपनानी चाहिए?
मोबाइल चार्ज होने के बाद चार्जर का स्विच बंद कर दें और यदि लंबे समय तक उपयोग नहीं करना है तो उसे प्लग से निकाल दें। हमेशा BIS प्रमाणित या ब्रांडेड चार्जर का ही इस्तेमाल करें। टूटे, गर्म होने वाले या स्पार्किंग करने वाले चार्जर को तुरंत बदल दें। एक्सटेंशन बोर्ड पर जरूरत से ज्यादा उपकरण एक साथ न लगाएं और बिजली के सॉकेट की समय-समय पर जांच कराते रहें।
खाली चार्जर बिजली की खपत जरूर करता है, लेकिन उसकी मात्रा बहुत कम होती है। फिर भी ऊर्जा बचत, उपकरणों की लंबी उम्र और घरेलू सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोबाइल चार्ज होने के बाद चार्जर का स्विच बंद करना एक अच्छी आदत है। यह छोटा-सा कदम न केवल बिजली की अनावश्यक बर्बादी रोकता है, बल्कि ओवरहीटिंग, शॉर्ट सर्किट और संभावित हादसों के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर सकता है।