राजधानी चौपाल, जींद।
Jind news : हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी के बैनर तले जींद डिपो की सभी यूनियनों ने जींद बस स्टैंड पर लोकल और लंबे रूट के बूथों को एक किए जाने के फैसले का कड़ा विरोध किया है। यूनियनों ने इसे यात्रियों की सुविधा और रोडवेज व्यवस्था के खिलाफ बताते हुए मंगलवार 19 मई 2026 से बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। इस संबंध में रोडवेज महाप्रबंधक को ज्ञापन भी सौंपा गया।
कर्मचारी नेताओं अनूप लाठर, सुरेंद्र सिंह, राजबीर मलिक, राजेश चोपड़ा, जितेंद्र लाठर, देवेंद्र घोडेला, रामेहर रेढू, अनिल गौतम, सोमबीर जांगड़ा और रघबीर सिहाग ने बताया कि जींद बस स्टैंड पर लंबे समय से लोकल मार्ग हांसी तथा लंबे रूट हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, गंगानगर और सालासर जाने वाली बसों के लिए अलग-अलग बूथ बनाए गए थे। यह व्यवस्था यात्रियों की सुविधा, भीड़ नियंत्रण और बसों के सुचारू संचालन को ध्यान में रखते हुए लागू की गई थी।
Jind news : यहां से शुरू हुई विरोध
यूनियन नेताओं के अनुसार 18 मई 2026 को महाप्रबंधक कार्यालय द्वारा दोनों बूथों को एक कर बसों का संचालन शुरू करवा दिया गया, जिससे रोडवेज कर्मचारियों और यूनियनों में भारी नाराजगी फैल गई। उनका कहना है कि अलग-अलग बूथ होने से यात्रियों को अपने रूट की बस आसानी से मिल जाती थी और बस स्टैंड परिसर में भीड़भाड़ की स्थिति भी नियंत्रित रहती थी। अब एक ही बूथ पर कई रूटों की बसें आने से अव्यवस्था बढ़ने की आशंका है।
रोडवेज यूनियनों ने संयुक्त रूप से महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि पहले की तरह अलग-अलग बूथों से बसों का संचालन बहाल किया जाए। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने फैसला वापस नहीं लिया तो 19 मई से बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी डिपो प्रशासन और जिला प्रशासन की होगी।
Jind news : पहले हांसी में भी आ चुका ऐसा मामला
कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि अलग-अलग बूथों की व्यवस्था समाप्त करने से रोडवेज बसों के संचालन पर असर पड़ेगा और इसका सीधा फायदा निजी बस ऑपरेटरों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्था को बिना किसी ठोस कारण बदला जाना विभाग को आर्थिक नुकसान पहुंचाने जैसा कदम है।
यूनियन नेताओं ने यह भी बताया कि इससे पहले हांसी बस स्टैंड पर भी अलग-अलग बूथ बनाए गए थे, जिसके खिलाफ निजी बस संचालकों ने वर्ष 2022 में हिसार न्यायालय में मामला दायर किया था। अदालत ने उस मामले में परिवहन विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया था और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशों का भी हवाला दिया गया था।