राजधानी चौपाल, हिसार। हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJU) में एक ऐसी तकनीक पर (Hisar news) काम शुरू होने जा रहा है, जो भविष्य में वाहनों को अधिक हल्का, मजबूत और ईंधन-कुशल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हरियाणा सरकार ने विश्वविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग को इस दिशा में अनुसंधान के लिए 35 लाख रुपये का प्रोजेक्ट सौंपा है।
इस शोध परियोजना का नेतृत्व विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं इंजीनियरिंग संकाय के डीन प्रोफेसर एच.सी. गर्ग कर रहे हैं। परियोजना का उद्देश्य ऐसी उन्नत सामग्री (एडवांस्ड मटेरियल) विकसित करना है, जो पारंपरिक धातुओं की तुलना में कम वजन वाली होने के बावजूद अधिक मजबूत और टिकाऊ हो। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता ली जाएगी।
Hisar news : औद्योगिक अपशिष्ट से तैयार होगी नई सामग्री
प्रोफेसर एच.सी. गर्ग के अनुसार इस शोध का एक महत्वपूर्ण पहलू पर्यावरण संरक्षण भी है। परियोजना के तहत उद्योगों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले चुनिंदा अपशिष्ट पदार्थों का उपयोग कर नई मिश्रित सामग्री (कंपोजिट मटेरियल) विकसित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि AI आधारित विश्लेषण की मदद से ऐसी सामग्री तैयार करने का प्रयास होगा, जो वाहन निर्माण में उपयोगी होने के साथ-साथ लागत के लिहाज से भी व्यवहारिक हो। इससे औद्योगिक कचरे के पुनः उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा।
Hisar news " वाहन हल्के होंगे, ईंधन की बचत बढ़ेगी
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नरसीराम बिश्नोई ने बताया कि किसी भी वाहन का वजन कम होने पर उसके इंजन पर कम दबाव पड़ता है, जिससे ईंधन की खपत घटती है। यही वजह है कि दुनिया भर में ऑटोमोबाइल कंपनियां हल्के और मजबूत मटेरियल विकसित करने पर जोर दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि GJU की यह परियोजना सफल होने पर भविष्य में ऐसे वाहनों का निर्माण संभव होगा, जिनमें पेट्रोल और डीजल की खपत में लगभग 6 से 7 प्रतिशत तक कमी लाई जा सके। इससे वाहन चालकों का खर्च कम होगा और कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की खपत में कमी का सीधा असर वायु प्रदूषण पर पड़ता है। यदि वाहन कम ईंधन खर्च करेंगे तो वातावरण में निकलने वाली हानिकारक गैसों की मात्रा भी घटेगी। ऐसे में यह परियोजना आर्थिक लाभ के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
Hisar news : युवाओं को मिलेगा रिसर्च का अवसर
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस परियोजना के माध्यम से शोध के क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवाओं को भी बेहतर अवसर मिलेंगे। प्रोजेक्ट के लिए जूनियर रिसर्च फेलो (JRF) की नियुक्ति की जाएगी, जिससे युवा शोधकर्ता अत्याधुनिक तकनीकों और AI आधारित अनुसंधान से जुड़ सकेंगे।
शोध टीम में ये विशेषज्ञ होंगे शामिल
परियोजना का नेतृत्व प्रोफेसर एच.सी. गर्ग करेंगे, जो वर्तमान में इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय के डीन होने के साथ-साथ विश्वविद्यालय के निर्माण विभाग की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। उनके साथ इस शोध में प्रोफेसर राजेश कुमार बतौर सह-अन्वेषक (Co-Investigator) कार्य करेंगे। वर्तमान में वह एक केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं।
क्यों खास है यह परियोजना?
- AI की मदद से विकसित होगी नई पीढ़ी की सामग्री
- वाहनों का वजन होगा कम, मजबूती बनी रहेगी
- पेट्रोल-डीजल की खपत में 6-7% तक कमी की संभावना
- औद्योगिक अपशिष्ट का होगा उपयोग
- कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण घटाने में मिलेगी मदद
- युवाओं के लिए रिसर्च और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे
यह परियोजना न केवल हरियाणा बल्कि देश के ऑटोमोबाइल और मटेरियल साइंस क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि शोध सफल रहता है तो भविष्य में भारतीय वाहन उद्योग को अधिक किफायती, पर्यावरण-अनुकूल और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने में इसकी बड़ी भूमिका हो सकती है।