राजधानी चौपाल, हांसी। पंचायत चुनाव में एक-एक वोट की अहमियत क्या होती है, इसका अनोखा उदाहरण हरियाणा के हांसी क्षेत्र के गांव पेटवाड़ में देखने को मिला है। करीब साढ़े तीन साल पहले हुए पंच पद के चुनाव का परिणाम अदालत के आदेश पर दोबारा हुई मतगणना के बाद बदल गया। 2022 में एक वोट से हारने वाली उम्मीदवार अब विजेता घोषित हुई हैं।
गांव पेटवाड़ के वार्ड नंबर-2 में नवंबर 2022 में पंच पद के लिए चुनाव हुआ था। चुनावी मुकाबला कमलेश और ऋतु के बीच था। उस समय हुई मतगणना में कमलेश को 119 वोट मिले थे, जबकि ऋतु के खाते में 118 वोट आए थे। मात्र एक वोट के अंतर से ऋतु को हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद भी विवाद समाप्त नहीं हुआ। ऋतु ने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और परिणाम को चुनौती दी।
Hansi news : कोर्ट के आदेश पर हुई दोबारा मतगणना
करीब 43 महीने तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने मामले में पुनर्मतगणना (रिकाउंटिंग) के आदेश दिए। शुक्रवार को नारनौंद स्थित बीडीपीओ कार्यालय में प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतपेटी खोली गई। दोबारा मतगणना के दौरान अधिकारियों ने प्रत्येक बैलेट की बारीकी से जांच की। इस प्रक्रिया में चुनाव परिणाम को बदल देने वाला तथ्य सामने आया।
Hansi news : दो वोट रद्द होने से बदल गया पूरा परिणाम
पुनर्मतगणना में ऋतु के मतों की संख्या पहले की तरह 118 ही रही। वहीं कमलेश के मतों की जांच के दौरान एक बैलेट पूरी तरह खाली पाया गया, जबकि दूसरे बैलेट पर दो स्थानों पर मुहर लगी हुई थी। नियमों के अनुसार दोनों मतों को अमान्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद कमलेश के कुल वैध मत 119 से घटकर 117 रह गए। वहीं ऋतु 118 वोटों के साथ एक वोट से आगे निकल गईं और विजेता बन गईं।
हार से जीत तक का सफर
जिस एक वोट ने वर्ष 2022 में ऋतु को हार का दर्द दिया था, उसी एक वोट के अंतर ने वर्ष 2026 में उन्हें जीत की खुशी दिला दी। अदालत के आदेश पर हुई इस पुनर्मतगणना ने चुनावी इतिहास में एक दिलचस्प उदाहरण पेश किया है।
रिकाउंटिंग के बाद ऋतु ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास था और आखिरकार उन्हें न्याय मिला है। उन्होंने कहा कि सत्य की जीत हुई है और न्यायिक प्रक्रिया ने लोकतंत्र में विश्वास को और मजबूत किया है।
वहीं पूर्व विजेता कमलेश ने कहा कि चुनाव के समय हुई मतगणना पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई थी। पुनर्मतगणना में खाली बैलेट और अन्य तकनीकी पहलुओं के सामने आने से कई सवाल खड़े होते हैं।
प्रशासन ने कोर्ट को भेजी रिपोर्ट
एसडीएम विकास यादव ने बताया कि न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया के तहत पुनर्मतगणना करवाई गई है। मतगणना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अदालत को भेज दी गई है। मामले में आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।
पेटवाड़ पंचायत का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि चुनाव में हर वोट की कीमत होती है। कई बार एक वोट न केवल उम्मीदवार की हार-जीत तय करता है, बल्कि वर्षों बाद चुनावी तस्वीर भी बदल सकता है।