राजधानी चौपाल, नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच दुनिया भर में नौकरीपेशा लोगों के मन में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आने वाले वर्षों में कौन-सी नौकरियां सुरक्षित रहेंगी और किन क्षेत्रों में मशीनें इंसानों की जगह ले सकती हैं। इसी बीच जून 2026 में जारी हुई एक नई रिसर्च रिपोर्ट ने इस बहस को नई दिशा दी है।
मानव-केंद्रित कौशलों पर काम करने वाली संस्था GoHumanize द्वारा जारी अध्ययन में 60 पेशेवर कौशलों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत हो जाए, कुछ ऐसी मानवीय क्षमताएं हैं जिन्हें पूरी तरह से ऑटोमेट करना AI के लिए बेहद मुश्किल होगा। अध्ययन में इन कौशलों को रोजगार बाजार की मांग, ऑटोमेशन की संभावना, नियोक्ताओं की प्राथमिकता और मानवीय गुणों जैसे भावनात्मक समझ एवं निर्णय क्षमता के आधार पर परखा गया।
AI : नेतृत्व क्षमता सबसे अधिक सुरक्षित
रिपोर्ट के मुताबिक, नेतृत्व (Leadership) वह कौशल है जिसे AI सबसे कम प्रभावित कर पाएगा। किसी संगठन का नेतृत्व करना केवल लक्ष्य तय करना या निर्णय लेना नहीं है, बल्कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सही दिशा चुनना, टीम को प्रेरित करना और अनिश्चित हालात में रणनीतिक फैसले लेना भी है। अध्ययन में पाया गया कि AI किसी वरिष्ठ नेतृत्वकर्ता की जिम्मेदारियों का सीमित हिस्सा ही संभाल सकता है, जबकि वास्तविक नेतृत्व अभी भी मानवीय अनुभव और समझ पर निर्भर रहेगा।
AI : टीमवर्क और सहयोग की भूमिका बनी रहेगी अहम
अध्ययन में सहयोग और टीमवर्क (Collaboration & Teamwork) को दूसरी सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षित स्किल माना गया है। आधुनिक कार्यस्थलों में विभिन्न लोगों के साथ तालमेल बनाना, विश्वास कायम करना और सामूहिक लक्ष्य हासिल करना ऐसी क्षमताएं हैं, जिनमें इंसानी व्यवहार और भावनात्मक समझ की बड़ी भूमिका होती है। लाखों जॉब लिस्टिंग्स के विश्लेषण में भी टीमवर्क को प्रमुख योग्यता के रूप में चिन्हित किया गया।
AI : नेगोशिएशन में इंसानी समझ की जरूरत
व्यावसायिक सौदों और महत्वपूर्ण निर्णयों में प्रभावी बातचीत (Negotiation) की कला का महत्व लगातार बना रहेगा। AI आंकड़ों का विश्लेषण कर सकता है और संभावित विकल्प सुझा सकता है, लेकिन सामने वाले व्यक्ति की मानसिकता को समझना, परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बदलना और भरोसेमंद संबंध बनाना अभी भी मानवीय कौशल का हिस्सा है। इसी वजह से रोजगार बाजार में नेगोशिएशन विशेषज्ञों की मांग मजबूत बनी हुई है।
मेंटरिंग और कोचिंग का विकल्प नहीं बनेगा AI
शिक्षा, मानव संसाधन और खेल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में मेंटरिंग और कोचिंग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, किसी व्यक्ति की भावनात्मक स्थिति, व्यवहार और व्यक्तिगत चुनौतियों को समझकर मार्गदर्शन देना मशीनों के लिए आसान नहीं है। अनुभवी मेंटर द्वारा दी जाने वाली प्रेरणा और व्यक्तिगत सलाह भविष्य में भी मूल्यवान बनी रहेगी।
पब्लिक स्पीकिंग में इंसानों की बढ़त कायम
पांचवें स्थान पर पब्लिक स्पीकिंग (Public Speaking) को रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मंच से प्रभावशाली संवाद स्थापित करना केवल जानकारी साझा करने का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं को समझकर उन्हें प्रभावित करने की कला भी है। श्रोताओं की प्रतिक्रियाओं के अनुसार अपने विचारों को प्रस्तुत करना और तत्काल संवाद स्थापित करना ऐसी क्षमता है जिसे AI पूरी तरह नहीं दोहरा सकता।
डेटा आधारित नौकरियों पर बढ़ सकता है दबाव
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि डेटा एनालिसिस जैसी प्रक्रियात्मक और नियम-आधारित नौकरियां AI के प्रभाव में तेजी से आ सकती हैं। ऐसे कार्य जो निर्धारित पैटर्न, कोडिंग और डेटा प्रोसेसिंग पर आधारित हैं, उन्हें मशीनें अपेक्षाकृत तेजी से सीख रही हैं। इसलिए इन क्षेत्रों में काम करने वाले पेशेवरों को नई कौशलों के विकास पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत
अध्ययन के निष्कर्षों में कहा गया है कि स्कूलों, कॉलेजों और प्रशिक्षण संस्थानों को अब अपने पाठ्यक्रमों में बदलाव करना होगा। केवल रटने या तय नियमों पर आधारित शिक्षा मॉडल भविष्य की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएंगे। इसके बजाय नेतृत्व क्षमता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, रचनात्मक सोच, समस्या समाधान और मानवीय संवाद कौशल पर अधिक जोर देना आवश्यक होगा।